इजराइल-ईरान युद्ध, दुनिया भर में जो जंग छिड़ी हुई है, उस पर आखिरकार भारत का रुख भी सामने आ गया है! इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में जो बयान दिया है, वो वाकई में बहुत बैलेंस और दमदार है।

चलिए जानते हैं कि जयशंकर जी ने मिडल ईस्ट के इस संकट पर क्या-क्या बड़ी बातें कही हैं:
भारत का स्टैंड ‘युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं’
जयशंकर जी ने साफ-साफ कह दिया कि भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है। उन्होंने संसद में जोर देकर कहा कि इस जंग की वजह से न केवल वहां रह रहे भारतीय, बल्कि पूरी दुनिया की इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ रहा है। भारत चाहता है कि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आएं और इस खून-खराबे को तुरंत रोकें।
प्रमुख मुद्दे जो जयशंकर ने उठाए:
- भारतीयों की सुरक्षा सबसे पहले: विदेश मंत्री ने बताया कि इजराइल और आसपास के इलाकों में हजारों भारतीय काम कर रहे हैं। सरकार की पहली प्राथमिकता उन्हें सुरक्षित रखना और ज़रूरत पड़ने पर सही-सलामत वापस लाना है।
- ग्लोबल इकोनॉमी पर असर: अगर ये जंग लंबी खिंचती है, तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और सप्लाई चेन भी टूट सकती है। इसका सीधा असर हमारी जेब पर पड़ेगा।
- कूटनीतिक बातचीत: जयशंकर जी ने ये भी कन्फर्म किया कि भारत लगातार दोनों देशों के संपर्क में है और प्रधानमंत्री मोदी भी शांति की अपील कर रहे हैं।
मेरा नज़रिया
सच कहूं तो, जयशंकर जी जिस तरह से इंटरनेशनल प्रेशर के बीच भारत का पक्ष रखते हैं, वो काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय ‘शांति और मानवता’ के साथ खड़ा है।
दोस्तों, आपको क्या लगता है? क्या भारत की मध्यस्थता से ये जंग रुक सकती है? या फिर हालात और खराब होने वाले हैं? अपनी राय नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं!
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